कुछ तो है तेरे मेरे दरमियाँ.."-कविता

कुछ तो है तेरे मेरे दरमियाँ...
..............................

कुछ तो है तेरे मेरे दरमियाँ..
तू मुझे वहाँ दुआएँ देती है,
और मुझे यहाँ नेमतें मिलती हैं।
कुछ तो है...


तू वहाँ उदास होती है,
मन मेरा यहाँ उचटता है।
तू वहाँ पे साँसें भरती है,
दिल मेरा यहाँ धड़कता है।
    कुछ तो है तेरे मेरे दरमियाँ,
    तू मुझे वहाँ दुआएँ देती है,
    और मुझे यहाँ नेमतें मिलती हैं,
कुछ तो है...


तू वहाँ पे कलियाँ बोती है,
मुझे यहाँ बगीचे मिलते हैं।
तू वहाँ दीये जलाती है,
मुझे यहाँ रौशनी मिलती है।
    कुछ तो है तेरे मेरे दरमियाँ...
    तू मुझे वहाँ दुआएँ देती है,
    और मुझे यहाँ नेमतें मिलती हैं..
कुछ तो है...


तू मुझे वहाँ याद करती है,
मैं यहाँ हिचकियाँ लेता हूँ।
तू वहाँ आँखें भिगोती है,
मैं यहाँ सिसकियाँ लेता हूँ।
    कुछ तो है तेरे मेरे दरमियाँ...
    तू मुझे वहाँ दुआएँ देती है,
    और मुझे यहाँ नेमतें मिलती हैं..
कुछ तो है...


तू वहाँ मुस्काया करती है,
मैं यहाँ खिलखिलाने लगता हूँ।
तू मुझे वहाँ निहारा करती है,
मुझमें यहाँ निखार आता है।
    कुछ तो है तेरे मेरे दरमियाँ...
    तू मुझे वहाँ दुआएँ देती है,
    और मुझे यहाँ नेमतें मिलती हैं...
    कुछ तो है तेरे मेरे दरमियाँ...
कुछ तो है...

-भूपेन्द्र भावुक

Comments