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'नाम' भर का 'वाम'..-लेख

' नाम' भर का 'वाम'... इस चुनाव में ये सिद्ध हो गया है कि भारत में 'वाम' अब 'नाम' भर का रह गया है। और ये भी है कि ये कोई एकदम से नहीं हो गया। इसका अपना लम्बा इतिहास रहा है। मेरी समझ में इसके त...

माननीय कृषि-मंत्री श्री राधामोहन सिंह जी के नाम खुला-पत्र

वर्तमान केन्द्रीय कृषि मंत्री और पूर्वी चम्पारण (मोतिहारी) से लगातार पाँचवी बार से सांसद माननीय राधामोहन सिंह जी के नाम ग्रामीणों का खुला पत्र - अरेराज अनुमंडल, थाना संग्...

मज़दूर- कविता

'अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस' पर दुनिया भर के मेहनतकश मजदूरों को समर्पित मेरी यह कविता 'मजदूर', ('जनकृति' में प्रकाशित).. इस गाँव का हो या उस गाँव का हो इसराज्य का हो या उस राज्य का ह...

दिल्ली विश्वविद्यालय इन दिनों "गुंडों" और "गुंडागर्दी" का अड्डा बना हुआ है....

दिल्ली विश्वविद्यालय इन दिनों ''गुंडों'' और ''गुंडागर्दी'' का अड्डा बना हुआ है  .... ---------------------------------------------------------------------------------------------                       घटना परसों (04/09/18) की है। आर्ट्स फैक्ल्टी भवन के हिंदी विभाग वाली गली (जिसके ठीक सामने पुराना कनवोकेशन हॉल है) में चंद क्षणों के लिए एक सीनियर भैया से हाथ मिलाने के लिए ठहरा ही था कि इतने में सामने से आ रहे 7-8 लड़कों के एक समूह ने मुझ पर हमला बोल दिया।  दरअसल हुआ यूँ कि जब मैं सीनियर भैया से हाथ मिला रहा था तभी वे लड़के मेरे सामने से गुजरे और उनमें से एक लड़का थोड़ा बगलकर निकलने की बजाये जानबूझकर मुझे धकेलते हुए अकड़पन में निकल गया।मैंने सिर्फ इतना कहा था कि- "देख के चल लो भाई'' बात बस इतनी ही थी कि उसके साथ के दूसरे लड़के मुझसे हाथापाई पर उतर आये।   ''तन्ने बोल्या कैसे??'' "तू जाणे है मन्ने??"                               ...

कुछ तो है तेरे मेरे दरमियाँ.."-कविता

कुछ तो है तेरे मेरे दरमियाँ... .............................. कुछ तो है तेरे मेरे दरमियाँ.. तू मुझे वहाँ दुआएँ देती है, और मुझे यहाँ नेमतें मिलती हैं। कुछ तो है... तू वहाँ उदास होती है, मन मेरा यहाँ उचटता है। तू वहाँ पे साँसें भरती है, दिल मेरा यहाँ धड़कता है।     कुछ तो है तेरे मेरे दरमियाँ,     तू मुझे वहाँ दुआएँ देती है,     और मुझे यहाँ नेमतें मिलती हैं, कुछ तो है... तू वहाँ पे कलियाँ बोती है, मुझे यहाँ बगीचे मिलते हैं। तू वहाँ दीये जलाती है, मुझे यहाँ रौशनी मिलती है।     कुछ तो है तेरे मेरे दरमियाँ...     तू मुझे वहाँ दुआएँ देती है,     और मुझे यहाँ नेमतें मिलती हैं.. कुछ तो है... तू मुझे वहाँ याद करती है, मैं यहाँ हिचकियाँ लेता हूँ। तू वहाँ आँखें भिगोती है, मैं यहाँ सिसकियाँ लेता हूँ।     कुछ तो है तेरे मेरे दरमियाँ...     तू मुझे वहाँ दुआएँ देती है,     और मुझे यहाँ नेमतें मिलती हैं.. कुछ तो है... तू वहाँ मुस्काया करती है, मैं यहाँ खिलखिलाने लगता हूँ।...

गुजरात और 'नोटा'-लेख

                     गुजरात और 'नोटा'           गुजरात के जनादेश के कांग्रेस-बीजेपी जो भी मायने निकालते हों, निकालें। जिस भी दृष्टि से अपनी पीठ थपथपाना चाहते हों, थपथपालें! वे इसके लिए स्वतन्त्र हैं। पर इस जनादेश का एक पक्ष ऐसा भी है जिस पर इनका ध्यान नहीं जा रहा है! और जाये भी तो क्यों?? और वो है 'नोटा' (NOTA-None Of  The Above) को मिले तकरीबन साढ़े पाँच लाख से अधिक वोट का । दरअसल NOTA विकल्प के अंतर्गत मतदाताओं को किसी भी उम्मीदवार को नापसन्द करने का अधिकार दिया गया है। इस विकल्प की व्यवस्था के लिए जनहित याचिकाओं के दबाव में सर्वप्रथम भारतीय निर्वाचन आयोग ने ही 2001 में सर्वोच्च न्यायालय में अपील की थी। जिस पर संज्ञान लेते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने एक लम्बी कालावधि के बाद 27 सितम्बर 2013 को EVM (Electronic Voting Machine) में NOTA विकल्प को स्थापित करने के आदेश दिए थे। जिसका प्रयोग सर्वप्रथम 2014 के लोकसभा चुनाव में हुआ ।              अब लौटते हैं अपने मूल विषय पर। ...

माननीय मुख्यमंत्री योगी जी के नाम खुला-पत्र

माननीय मुख्यमंत्री(उत्तर प्रदेश) योगी आदित्यनाथ जी के नाम खुला पत्र- ------------------------------------------------- प्रिय योगी जी, प्रणाम !                                 सर्वप्रथम आपको मुख्यमंत्री बनने की हार्दिक बधाई। आशा करता हूँ कि आप प्रदेश की जनता की उम्मीदों पर खरा उतरेंगे और जैसा कि प्रदेश के सभी वर्गों का आपको साथ मिला है, उसे भी आप तठस्थ होकर निभाएंगे।                     प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में स्वच्छता का जो 'आंदोलन' और विकास की जो 'रीति' चली है,  उसे जनता का भी भरपूर साथ मिल रहा है, पर इसका फ़लक राजनैतिक और सामाजिक ही अधिक है। आधुनिकता की दौड़ में सुचिता और विकासशीलता का सांस्कृतिक पक्ष छूटता जा रहा है। हमें भौतिक विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक विकास पर भी ज़ोर देना हो...