चन्द आईफोन वाले..-कविता
चन्द आईफोन वाले...
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उबड़ खाबड़ चेहरे
और
पतझड़ से शरीर वाला
जर्जर से रिक्शे पर सवार
वो जर्जर आदमी,
पहाड़-सी चढ़ान पर
लमर-लमर कर खींचता
आईफोन वाले
दो मोटे-मोटे लोगों को,
गंदेले ढीले-ढाले जामे में
पसलियों की टाट
खरखराती,
और उस पर चिपकीं
उसकी नसें
एंड़ी से चोटी तक
लत्तरों-सी
छितरायीं,
कपार की लकीरें
खिसककर
दोनों भौहों के
बाएँ-दाएँ धड़कतीं
दूर से दिखतीं,
लगता जैसे कोई
साँसें ले रहा हो
कैजुएलिटी में।
वो सदियों से
और उसका ये जीवन
सदियों-सा,
और उस जैसे अनन्त
जुते हुए हैं
सदियों से,
अनन्त उन पहियों में
जिन पर सवार हैं
चन्द आईफोन वाले ।।
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उबड़ खाबड़ चेहरे
और
पतझड़ से शरीर वाला
जर्जर से रिक्शे पर सवार
वो जर्जर आदमी,
पहाड़-सी चढ़ान पर
लमर-लमर कर खींचता
आईफोन वाले
दो मोटे-मोटे लोगों को,
गंदेले ढीले-ढाले जामे में
पसलियों की टाट
खरखराती,
और उस पर चिपकीं
उसकी नसें
एंड़ी से चोटी तक
लत्तरों-सी
छितरायीं,
कपार की लकीरें
खिसककर
दोनों भौहों के
बाएँ-दाएँ धड़कतीं
दूर से दिखतीं,
लगता जैसे कोई
साँसें ले रहा हो
कैजुएलिटी में।
वो सदियों से
और उसका ये जीवन
सदियों-सा,
और उस जैसे अनन्त
जुते हुए हैं
सदियों से,
अनन्त उन पहियों में
जिन पर सवार हैं
चन्द आईफोन वाले ।।
बहुत अच्छा...👍
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